सारंगढ़-बिलाईगढ़। जिले के टीमरलगा (महादेवी चौक) स्थित खनिज जाँच चौकी की कार्यप्रणाली इन दिनों सवालों के घेरे में है। स्थानीय लोगों एवं क्षेत्रीय सूत्रों के अनुसार खनिज जाँच चौकी का संचालन लंबे समय से बिना नियमित प्रभारी के किया जा रहा है, जिससे चौकी में व्यवस्थागत खामियां एवं अनियमितताओं की आशंका बढ़ गई है।
जानकारी के अनुसार उक्त चौकी जिले में खनिज परिवहन की निगरानी तथा अवैध खनिज उत्खनन एवं परिवहन पर नियंत्रण के उद्देश्य से स्थापित की गई है। चौकी से प्रतिदिन बड़ी संख्या में रेत, गिट्टी, मुरुम एवं अन्य खनिज सामग्री से लदे भारी वाहन गुजरते हैं। ऐसे में चौकी की जिम्मेदारी और जवाबदेही अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि चौकी में नियमित प्रभारी अधिकारी की अनुपस्थिति के कारण निगरानी व्यवस्था प्रभावित हो रही है। वहीं कई बार वाहन चालकों एवं आम नागरिकों द्वारा यह सवाल उठाया जाता रहा है कि आखिर चौकी का संचालन किसके निर्देशन में किया जा रहा है तथा वहां की गतिविधियों की जवाबदेही किस अधिकारी के पास है।
क्षेत्र के नागरिकों का कहना है कि यदि किसी चौकी में प्रभारी अधिकारी ही पदस्थ नहीं है या नियमित रूप से उपलब्ध नहीं है, तो जांच एवं सत्यापन की प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। लोगों का मानना है कि शासन द्वारा स्थापित जांच चौकियों का उद्देश्य नियमों का पालन सुनिश्चित करना है, लेकिन यदि प्रशासनिक व्यवस्था ही स्पष्ट न हो तो इसका लाभ नियमों का उल्लंघन करने वाले तत्वों को मिल सकता है।
सूत्रों के अनुसार चौकी में पदस्थ कर्मचारियों की भूमिका, ड्यूटी निर्धारण तथा कार्य संचालन से जुड़ी जानकारी भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है। इससे आमजन के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है। स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि खनिज विभाग एवं जिला प्रशासन इस मामले की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करे।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि जिले में खनिज संपदा से जुड़े मामलों को लेकर प्रशासन लगातार सख्ती की बात करता रहा है, लेकिन टीमरलगा खनिज जाँच चौकी की वर्तमान स्थिति कई सवाल खड़े कर रही है। यदि चौकी का संचालन बिना अधिकृत प्रभारी के किया जा रहा है तो यह प्रशासनिक व्यवस्था की गंभीर कमी मानी जा सकती है।
नागरिकों ने कलेक्टर एवं संबंधित विभागीय अधिकारियों से मांग की है कि चौकी की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच कराई जाए, वहां पदस्थ कर्मचारियों की जानकारी सार्वजनिक की जाए तथा जिम्मेदार अधिकारी की नियमित नियुक्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि खनिज परिवहन की निगरानी पारदर्शी एवं नियमसम्मत तरीके से हो सके।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और टीमरलगा खनिज जाँच चौकी में व्याप्त कथित अव्यवस्थाओं को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
