सारंगढ़-बिलाईगढ़:(DNI )जिले के कोसीर थाना अंतर्गत आने वाले लेन्ध्रा (छोटे) धान खरीदी केंद्र में मंगलवार की शाम भारी बवाल हो गया। मामला इतना बढ़ा कि पुलिस को दो अलग-अलग एफआईआर (FIR) दर्ज करनी पड़ी है। एक ओर धान खरीदी केंद्र के प्रभारी ने कथित पत्रकारों पर डरा-धमका कर पैसे मांगने का आरोप लगाया है, वहीं पत्रकारों ने आरोप लगाया है कि मंडी में हो रही अवैध धान की ‘छल्ली’ (बिचौलियों की धान की सेटिंग) का वीडियो बनाने पर उन्हें बंधक बनाकर पीटा गया और पेट्रोल से जलाने की कोशिश की गई। [जांच का विषय]
पक्ष 1 : का आरोप – सच दिखाने पर मिली मौत की धमकी? केशव वैष्णव (IND-24) और कमल सिंह यादव (दैनिक जनसंपर्क भारत) के अनुसार, उन्हें किसानों से शिकायत मिली थी कि लेन्ध्रा मंडी में भारी अनियमितता हो रही है। बड़े नेताओं और रसूखदारों का धान बिना तौले सीधे खपाया जा रहा है, जबकि छोटे किसानों को प्रताड़ित किया जा रहा है। (हालांकि इसकी जानकारी उच्च अधिकारी को तत्काल देना था ताकि समिति के ऊपर तत्काल कार्यवाही होता)
प्रथम पक्ष के द्वारा दर्ज कराई गई FIR (No. 0261) के मुख्य बिंदु :
अंधेरे में हमला : शाम करीब 7 बजे मंडी की लाइट बंद कर दी गई और फड़ प्रभारी मोहर लाल साहू ने 20-25 बाहरी गुंडों को बुला लिया। ((CDR,HDR कि निकाल का सही और गलत की सूक्ष्मता से जांच होना चाहिए))
जानलेवा हमला : पत्रकारों को लाठी-डंडों से पीटा गया, जिससे उन्हें सिर, आंख और रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोटें आई हैं।(डॉक्टरी रिपोर्ट के बाद गंभीर धाराओं का हो सकता है विश्लेषण)
सबूत मिटाने की कोशिश : आरोपियों ने चैनल सदस्यों के मोबाइल छीन लिए जिनमें घोटाले के वीडियो साक्ष्य मौजूद थे। साथ ही उनके पर्स और पहचान पत्र भी लूट लिए गए।(पीड़ितों का आरोप)
जिंदा जलाने का प्रयास : आरोप है कि उन पर पेट्रोल छिड़ककर जिंदा जलाने और चाकू से मारने की धमकी दी गई। (सेवा सहकारी समिति धान खरीदी केंद्र में CCTV कैमरा लगा हुआ होगा उसकी सूक्ष्मता से जांच करना अतिआवश्यक)
पक्ष 2 : फड़ प्रभारी का आरोप – “पत्रकारिता के नाम पर अवैध वसूली” – वहीं, फड़ प्रभारी मोहर कुमार साहू ने पत्रकारों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए इसे वसूली का मामला बताया है।(जांच में हो सकता है खुलासा क्या सच क्या झूठ)
प्रभारी द्वारा दर्ज कराई गई FIR (No. 0262) के मुख्य बिंदु :
20 हजार की मांग : प्रभारी का आरोप है कि केशव वैष्णव, जगन्नाथ बैरागी और उनके साथियों ने पत्रकारिता का धौंस (डर)दिखाकर 20,000 रुपये की मांग की।
सरकारी काम में बाधा : आरोपियों ने शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाई और पैसे न देने पर बदनाम करने की धमकी दी का लगाया आरोप।
कानूनी कार्रवाई (BNS के तहत पहली बड़ी कार्रवाई) – पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है: एक के विरुद्ध गंभीर धारा तो दूसरी के विरोध मामूली धारा।
बड़े सवाल: आखिर सच क्या है? – यह घटना छत्तीसगढ़ के धान खरीदी केंद्रों की सुरक्षा और वहां व्याप्त पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े करती है :
अगर पत्रकार वसूली करने गए थे, तो क्या उन्हें पीटकर लहूलुहान करना और उनके मोबाइल लूटना कानूनन सही है?
क्या मंडी में वाकई ‘बड़े किसानों और नेताओं’ का धान घर से सीधे तौलकर लाया जा रहा है?
मंडी के प्रभारी ने ‘बाहरी गुंडों’ के शामिल होने और लाइट बंद करने के आरोपों पर अब तक सफाई क्यों नहीं दी?
प्रशासनिक जांच की मांग : इलाके के किसानों और मीडिया जगत में इस घटना को लेकर भारी रोष है। मांग की जा रही है कि फड़ प्रभारी के कॉल रिकॉर्ड्स (CDR) की जांच हो ताकि हमले में शामिल ‘अदृश्य’ चेहरों का पता चल सके और धान खरीदी में हो रहे असली घोटाले की निष्पक्ष जांच हो। दोषियों के विरुद्ध अपराध कायम मजबूती से बनाकर जेल भेजे वही निर्दोष को दोषमुक्त होना चाहिए।
