सारंगढ़। छत्तीसगढ़ के सारंगढ़ से एक ऐसा हैरतअंगेज और रूह कंपा देने वाला मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था और भू-राजस्व प्रणाली की साख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ एक मृत महिला की करोड़ों की संपत्ति को ठिकाने लगाने के लिए नियम-कानूनों की धज्जियाँ उड़ाते हुए एक बड़े फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया है।
मृत्यु के बाद भी ‘जिंदा’ हो गई फाइलें!
मिली जानकारी के अनुसार, कौशिल्या बाई नाम की महिला की मृत्यु काफी समय पहले हो चुकी है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि उनकी मौत के बाद भी सरकारी फाइलों में ऐसा “जादू” चला कि उनकी कीमती संपत्ति का नामांतरण (Mutation) किसी दूसरे के नाम पर कर दिया गया। आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में राजस्व नियमों को ताक पर रख दिया गया और दस्तावेजों में जमकर हेरफेर की गई।
फर्जी वसीयतनामा: साज़िश की गहरी परतें
इस मामले में सबसे गंभीर और हैरान करने वाला मोड़ तब आया, जब यह बात सामने आई कि इस खेल को अमलीजामा पहनाने के लिए एक संदिग्ध वसीयतनामा (Will) तैयार किया गया था। इस वसीयत को पूरी तरह फर्जी और कूटरचित बताया जा रहा है। यदि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है, तो यह इलाक़े का सबसे बड़ा जमीन घोटाला साबित हो सकता है, जिसमें कई रसूखदार चेहरे बेनकाब होंगे।
प्रशासनिक शह या आंखें मूंदने की लापरवाही?
इस पूरे मामले ने सीधे तौर पर स्थानीय प्रशासन और राजस्व विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया है। जनता के बीच तीखे सवाल तैर रहे हैं:
जब कौशिल्या बाई इस दुनिया में थीं ही नहीं, तो उनके दस्तखत या अंगूठे के निशान कैसे लिए गए?
पटवारी, तहसीलदार और संबंधित अधिकारियों ने नामांतरण से पहले दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) क्यों नहीं किया?
क्या यह सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है, या फिर ‘ऊपर से नीचे तक’ मिलीभगत कर इस काले खेल को अंजाम दिया गया है?
जांच की मांग तेज, घिरे जिम्मेदार
मुर्दा महिला की जमीन हड़पने के इस सनसनीखेज खुलासे के बाद पूरे क्षेत्र में आक्रोश है। मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग तेजी से पकड़ रही है। पीड़ित पक्ष और स्थानीय लोग अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। देखना होगा कि इस गंभीर जालसाजी पर प्रशासन कुंभकर्णी नींद से जागकर क्या कार्रवाई करता है, या फिर हर बार की तरह इस रसूखदार खेल की फाइल को भी दबाने की कोशिश की जाएगी।

